क्यों विवाहित महिलाएं पहनती है बिछिया

शादी के बाद महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है| इन सोलह श्रृंगार के 15 वें पायदान पर पैर की उँगलियों में पहनने वाली बिछिया आती है| चांदी की बनी बिछिया के पारंपरिक गुण होने के साथ साथ कुछ विज्ञानिक फायदे भी होते है| बिछिया का सबंध सीधा गर्भाशय से जुड़ा होता है | इन्हें दोनों पैरो में पहनने से मासिक चक्र नियमित होती है| आयुर्वेद चिकित्सा में फर्टिलिटी प्रजनन क्षमता को बढ़ाने के लिए बिछिया के महत्व को माना गया है|विज्ञान में माना गया है पैरो के अंगूठे की तरफ से दूसरी अंगुली में एक विशेष नस होती है जो गर्भाशय से जुड़ी होती है | यह गर्भाशय को नियंत्रित करती है और रक्तचाप को संतुलित रखती है| साईटिक नर्व की एक नस को बिछिया दबती है, जिस वजह से आस पास की दूसरी नसों में रक्त का प्रवाह तेज होता है और युटेरस ,ब्लैडर व आंतो तक रक्त का प्रवाह ठीक होता है| गर्भाशय तक सही मात्रा में रक्त पहुंचता रहता है| चांदी एक गुड कंडक्ट धातु है, यह पृथ्वी की ध्रुवीय उर्जा को अवशोषित करके शरीर तक पहुंचाती है | तनावग्रस्त जीवनशैली के कारणों से अधिकांश महिलओं का मासिक-चक्र अनियमित हो जाता है| इन सब में चांदी की बिछिया को एक महत्वपूर्ण धातु माना जाता है |

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