बेवजह की है ये कसरत …….

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इन दिनों चुनाव आयोग से कुछ विपक्षी दलों को ख़ास शिकायत हो गई है | यही वजह है कि उन दलों के प्रतिनिधि मंडल ने जाकर चुनाव आयुक्त से न सिर्फ मुलाकात की है बल्कि उनसे अपील की है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को ” रिवर्स गियर ” में ले जाया जाय और एक बार पुनः देश के चुनाव बैलेट पेपर की पुरानी पद्धति से कराने की व्यवस्था हो | अब इन दलों की अक्ल को क्या कहा जाए कि पूरी दुनिया और दुनिया के तौर तरीके आधुनिक हो रहे हैं और ये हताश – निराश, परास्त दल देश को पीछे घसीटने की कोशिश में लगे हैं |चुनाव आयुक्त ने इन्हें पहले भी अच्छी तरह समझा दिया है की जिस ई वी एम् मशीन की शिकायत ये लोग कर रहे हैं उसके साथ किसी भी तरह की छेड़ – छाड़ नामुमकिन है आयोग ने यह स्पष्ट कहा है कि इस मशीन को बनाने वाले भी इससे छेड़ – छाड़ नहीं कर सकते | कांग्रेस , बसपा , राजद , अन्ना द्रमुक और सबसे बढ़कर केजरीवाल की आप पार्टी भाजपा की प्रचंड जीत को न तो पचा पा रही है और न ही उसकी अपार सफलता को स्वीकार करना चाहती है |अपनी – अपनी हार का ठीकरा इन सभी पार्टियों ने ई वी एम् मशीन पर फोड़ दिया है जो किसी भी स्तर और नज़रिए से न तो सच है और न ही उचित |केजरीवाल ने तो चुनाव आयोग को धृत राष्ट्र की संज्ञा दे डाली | केंद्र सरकार को कोसने और मोदीजी से नफरत करने के अलावा इन दलों के पास कोई काम नहीं है |अगर आम आदमी की भाषा में कहूं तो , ये तमाम पार्टियाँ भाजपा की जीत से पागल हो गई हैं और विवेक खो चुकी हैं | इन सबको इस बात का भी आभाष हो गया है की २०१९ के आम चुनाव में भी इन सबको जनता बुरी तरह नकारने वाली है |वैसे कांग्रेस , बसपा , राजद , सपा के साथ साथ इस कुनबे में ज्यादातर वही दल है , जो न सिर्फ राजनीति के अपराधीकरण के सूत्रधार और जिम्मेदार हैं बल्कि जिन्होंने हर चुनाव में ” बूथ लूट ” का सहारा लेकर अपनी नैय्या पार लगाईं है | ज़रा याद कीजिये , सत्तर , अस्सी और नब्बे के दशक के चुनाव जिनमे नक्सलियों और गुंडे – शोहदों की चांदी रहती थी | इन सब पर भारी रकम खर्च किया जाता था और वोटर्स की जिंदगी इनके रहमो – करम पर रहती थी | उसी माहौल की वकालत कर रहे हैं ये सब और कांग्रेस उनकी मुखिया बनी हुई है |फिलहाल ऐसे छोटे – बड़े दल मिला भी लें तो उनकी संख्या १२ – १३ है , जबकि मोदी के साथ और केंद्र सरकार के पक्ष में एकजुट पार्टियों की संख्या है तीन दर्ज़न से भी ज्यादा | वैसे भी चुनाव आयोग इन दलों की हर दलील का जवाब बड़े ही तर्कसंगत और वैधानिक ढंग से दे चुका है , फिर भी ये हताश – निराश दल अपनी खामियों का आंकलन करने की बजाय बेवजह की चीजों को तूल दे रहे हैं |वैसे भी चुनाव आयोग जैसी संस्था पर सवाल खड़े करना और उसके खिलाफ अनाप -शनाप बकना किसी को भी मानसिक दिवालिये की श्रेणी में ही खड़ा करता है |बेहतर हो की विपक्षी पार्टियाँ जनता के मूड को समझे , उनकी जरूरतों को समझे और सबसे बड़ी बात यह समझे कि उन्हें बेवकूफ बनाने का ज़माना अब काफी पीछे छूट चुका है | सिर्फ ” जनता जनार्दन महान ” का नारा अब नहीं चलने वाला | सिर्फ अपने परिवार का भला करने वाला नेता अब जनता को स्वीकार्य नहीं |

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