विपक्ष की बेचैनी और एकता का राग

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विपक्षी नेताओं की बेचैनी इन दिनों चरम पर पहुँचती जा रही है |सभी का घूँट पीने की बात कर रहे हैं | सभी का यही बयां आ रहा है कि ” देश को बचाने के लिए वो अपने कट्टर दुश्मन और परंपरागत प्रतिद्वंदी पार्टी से भी हाथ मेलने को तैयार हैं “| मायावती से लेकर अखिलेश तक , और राहुल गाँधी से लेकर लालू प्रसाद यादव तक बेचैन हैं  भारत की भोली – भाली जनता को भाजपा के चंगुल से छुड़ाने के लिए | नीतीश , ममता बनर्जी , शरद पवार के साथ अब ओडिशा के मुख्य मंत्री नवीन पटनायक भी भाजपा को रोकने के लिए कुछ भी करने को बेचैन हो गए हैं |किसी पार्टी या केंद्र सरकार के विरुद्ध विपक्षी एकता हमारे देश में नई बात नहीं , लेकिन साथ ही इस एकता की हवा निकल जाना भी सर्व विदित है |उपरोक्त सभी नेताओं और उनकी पार्टियों को अचानक देश की जनता का दर्द इतना सताने लगा है कि जनता खुद हैरान हो गयी है |अपनी खुश हाली और बेहतरी के लिए देश की जनता ने इन पार्टियों को कभी इतना द्रवित होते नहीं देखा | कांग्रेस ने इसी देश की जनता को पूरे साठ साल ठगा और ये सभी पार्टियाँ कभी सरकार में रहकर और कभी बाहर से उसका समर्थन करती रहीं |जनता कराहती रही पर इनकी नींद नहीं खुली |ये सभी नेता अपनी तिजोरियां भरने में लगे रहे | अगर आप इनकी जन्म कुंडली निकाले तो हर बात शीशे की तरह साफ़ हो जायेगी |इन सबने जब राजनीति में प्रवेश किया था ( देश और जनता की सेवा के नाम पर ) उस वक़्त इनकी माली हालत बेहद मामूली थी |मगर आज ये सब और इनके परिजन अरबपति – करोडपति हैं | यही है इनकी देश और जनसेवा |इनमे कोई स्कूल टीचर , कोई अध्यापक , कोई जूनियर इंजीनियर , कोई किसी बड़े नेता का अंगरक्षक और कोई सौ फीसद बेरोजगार था | आज भी इन्हें सिर्फ अपनी चिंता है | ये सब न तो उस सरकार का सम्मान कर रहे हैं जिसे देश की करोड़ों जनता ने अपना वोट देकर चुना है और न ही इनके मन में उस जनता के लिए कोई इज्जत है जो लोकतंत्र का आधार होने के साथ साथ बेहद विवेकशील है |सच ये है कि इन सबका असली चेहरा अब बेनकाब हो रहा है |इन्हें दर है कि इनकी काली और बेनामी संपत्ति अब इनसे छीन ली जायेगी |वैसे भी आज की तारीख में विपक्ष का कोई चेहरा नहीं है |भविष्य में भी कोई उम्मीद नहीं | इन सबको २०१९ के आम चुनाव की चिंता सता रही है क्यूंकि इन सबको पता है कि उसमे इनकी रही – सही हैसियत भी समाप्त हो जायेगी |कोई नीतीश को प्रधान मंत्री देखना चाहता है , तो कोई राहुल गाँधी को | शरद पवार और मायावती भी पीछे हटेंगे नहीं |ममता दीदी अपना नाम पहले ही आगे बढ़ा चुकी हैं | यानी , जितनी पार्टियाँ उतने प्रधान मंत्री कैंडिडेट |फिलहाल केंद्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक जिस ढंग से एक नई कार्य शैली विकसित हो रही है और उसमे जनता का विश्वास बढ़ रहा है उससे इन डालो का बेचैन होना स्वाभाविक है |अगर इन्हें कुछ पाना है तो अपने – अपने प्रदेश को हर मोर्चे पर मज़बूत करना होगा |उदाहरण के लिए अगर बिहार की ही बात करे तो सिर्फ शराबबंदी का जाप करने से काम नहीं बनेगा |प्रदेश में निरंतर बढती बेरोजगारी , बेलगाम अपराध , बिजली , पानी , सहित तमाम मूलभूत और आवश्यक जरूरतों से त्रस्त जनता को सुविधाओं के साथ साथ बेहतर भविष्य का भरोसा भी देना होगा |सिर्फ बयानबाजी और आश्वासनों से अब काम नहीं चलेगा | गाँधी को याद कर लेना ही पर्याप्त नहीं होगा , किसानो की हालत भी सुधारनी होगी |एक दर्जन भ्रष्ट नेताओं और पार्टियों के एक मंच पर आने से कुछ नहीं होने वाला | देश की जनता अब सोचने – समझने लगी है ,और उसकी उम्मीदें आप सिर्फ लुभावने वादों से पूरा नहीं कर सकते ,इस हकीकत को उसने जान लिया है |वैसे भी बड़ी पुरानी कहावत है कि “काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती ” |

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