ई वी एम् डेमो का ड्रामा

दिल्ली विधान सभा में आज दिन भर ई वी एम् डेमो का ड्रामा चला |आप के विधायक (पेशे से इंजिनियर )सौरभ भारद्वाज ने दिन भर एक ई वी एम् मशीन को दिखाया और यह स्थापित करने की कोशिश करते रहे कि इस मशीन के साथ कैसे बड़ी ही आसानी से छेड़ छाड़ की जा सकती है |जाहिर है उनकी यह कोशिश और उनका यह ‘अद्भुत’ ज्ञान पूरे भारत को आप की तरफ से तब दिखाया गया जब ” ईमानदार शिरोमणि “अरविन्द केजरीवाल अपने ही विधायक और पूर्व मंत्री कपिल शर्मा के आरोपों से भागे फिर रहे हैं |ज़ाहिर है ये सारा ड्रामा केजरीवाल के चेहरे पर लगी कालिख से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश थी |

सवाल यह उठता है कि श्री भारद्वाज के पास यह ई वी एम् मशीन आई कहां से ? क्यूंकि ई वी एम् मशीन चुनाव आयोग की देख -रेख में पूरी सुरक्षा के साथ रखी जाती है जिसके पास पहुंचना आम आदमी के लिए संभव नहीं |दूसरी बात यह कि ,यह मशीन कोई बच्चों का खिलौना नहीं जिसे किसी भी दुकान से खरीद लिया जाए |अब ऐसे में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि आप विधायक के पास यह मशीन कहाँ से आई ,किसने दी ,कब दी और कितने में दी ? दूसरी बात यह कि जिस मशीन के डेमो का अधिकार सिर्फ और सिर्फ चुनाव आयोग के पास है उसका इस्तेमाल दिल्ली विधान सभा में करने की इज़ाज़त किसने दी |बहरहाल , जिसे आप पार्टी के लोग डेमो बता रहे हैं वो दरअसल एक दंडनीय अपराध है |अपने नेता के दामन पर लगे दाग से लोगों का ध्यान भटकाने के और भी रास्ते हो सकते थे यदि ‘आप थिंक टैंक ‘ ने सोचा होता ,क्यूंकि इसमें उसे महारत हासिल है |फिलहाल पूर्व आप मंत्री कपिल मिश्रा ने सी बी आई को तमाम सबूत सौंपे हैं जिनके आधार पर केजरीवाल को सी बी आई ने नोटिस ज़ारी कर दी है |बात करते हैं ई वी एम् मशीन के डेमो की |चुनाव आयोग के पूर्व पर्यवेक्षक श्री के जे राव ने  दिल्ली विधान सभा में ई वी एम् डेमो को सिरे से नकारते हुए कहा है कि ,” ई वी एम् से छेड़ -छाड़ नामुमकिन है” |वैसे इतना तो केजरीवाल भी मानेगे कि श्री के जे राव की ईमानदारी पर आज तक कोई उंगली नहीं उठा सका है |दूसरी बात यह कि ,इस ड्रामे बाज़ी के बाद चुनाव आयोग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी राजनीतिक दलों को १० मई यानि कल बुलाया है और खुली चुनती दी है कि वे ई वी एम् मशीन से छेड़ – छाड़ करके दिखाएं |अब तो भारत की जनता भी चाहती है कि इस मामले में केजरीवाल की पार्टी और उसके आरोपों की सच्चाई सामने आ जाए |इस पार्टी का आरोप सच साबित न होने पर (जो वैसे  तो सौ प्रतिशत झूठ है ) चुनाव आयोग को सख्त से सख्त कदम उठाते हुए न सिर्फ इसकी मान्यता रद्द कर देनी चाहिए बल्कि आज के ड्रामे (तथाकथित डेमो ) में शामिल एक -एक सदस्य के खिलाफ ऍफ़ आई आर दर्ज कर उसे दंड भी दिलवाना चाहिए |यह इसलिए जरूरी है ताकि न सिर्फ चुनाव आयोग की मर्यादा बनी रहे बल्कि लोकतान्त्रिक मर्यादा की भी रक्षा हो |

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