तस्वीरे बोलती है ………

तस्वीरे बोलती है …………………………………

रोज सुबह उठने के साथ वापस न सो जाऊ इसलिए अपने फ्लैट के बरांडे में जाकर बैठ जाता हूँ सामने जो घटता है कई दिनों से सूक्ष्म अवलोकन करने के उपरांत आज शब्दों में ढालकर आप सब से भी साझा कर रहा हूँ उम्मीदन आप सब शब्दों में उन जीवनों का अनुभव कर पाए जिनसे आपको मै मिलवाने वाला हूँ-

तस्वीर में आप प्रकृति कि एक मनमोहक छठा देख रहे है जो कई घने वृक्षों के झुर्मुठो में दिख रही है सामने बिजली की नंगी तारे; तारो के पीछे कुछ झोपड़ियाँ और झोपड़ियो के बीच एक अव्यवस्थित गायो का तबेला| चुकी गौ है तो गौमूत्र और गोबर भी है| एक तरफ बरसात की चंद बूंदों के कारण पानी से भरी सडक भी दिख रही है जो अमुमन दो घंटे की वारिश के बाद जलमग्न हो जाती है और सडक के दाहिनी तरफ कचड़ो का ढेर, जिसपर प्रशासन की गैर-जिम्मेदाराना रवैया स्पष्ट है और अब कई वर्षो के उपरांत आमजन भी इसके आदतन हो गये है| पर इन सब के बीच एक भरा-पूरा परिवार भी है जो अपनी पूरी दिनचर्या सामने दिख रही तबेले में जीता है गायो की सेवा करके और उनके द्वारा प्राप्त दूध को सुबह शाम बेचकर, अपना जीवन गुजर-बसर करता है|

सामने दिख रही ऑटो में तीन लोग दिख रहे है जिसमे से एक इस परिवार का मुखिया है जो रोज सुबह-शाम इसी ऑटो में गांजा का सेवन करता है अपने कुछ मित्रो के साथ और फिर अपनी गायो का दूध निकालने बैठता है| उसका बेटा दिनरात गायो की सेवा में लगा रहता है और नित्य रूप से सुबह शाम दो गायो को जो दिखने में कमजोर प्रतीत होती है और सम्भवत: कम दूध देती है ‘ओक्सिटोसीन’ की सुई लगाकर दूध निकलता है| एक पोता भी है जो पिता के साथ गायो कि सेवा करता है तबेले को साफ करता है| पिता और दादा का बाकि कामो में भी हाथ बटाता है| लड़का, बिहार की राजधानी पटना में रहते हुए इतनी तरह की शिक्षा अभियानों के चलने के बाद भी स्कुल नही जाता| कई बार इस विषय पर मैंने उसके पिता से बात की तो पिता का मानना है कि, “पढला लिखला से नौकरी त होतई न; नौकरी ला त घुसे देवे परत, घुस कहाँ से अतई सर|”

फिर तस्वीर आखिर क्या बोल रही है —

  • हरियाली सम्भव है यदि हम अपने स्तर पर संकल्प कर ले|
  • बिजली की तारे कई वर्षो तक आगे भी नंगी रहने वाली है अत: इनका आते जाते ध्यान रखे नही तो आप किसी दिन दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं|
  • पटना आज भी बुरी तरह से जल-जमाव से पीड़ित है और जिला प्रशासन बेफिक्र सोई हुई है |
  • २०१५ की बरसात के बाद पटना जिलाधिकारी ने ये आदेश जारी किया था की गायो के तबेले शहर से दूर खोले जाये ताकि जलजमाव कि स्थिति से निपटने में इससे मदद होगी|
  • मादक पदार्थो का सेवन पूर्ण रुपेण बंद है सरकारी कानूनों में- पर उल्लघन भी जमके हो रहा है|
  • गौ को सुई लगाकर दूध निकलना गैर क़ानूनी है पर ऐसा हर तबेले में होता है|
  • राजधानी पटना में भी एक परिवार का इकलौता बच्चा स्कुल नही जाता|
  • और उसके पिता को आज भी सरकारी – व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण तनिक भी विश्वास नही कि सरकारी नौकरी बिना पैसो के सम्भव है|

सरकारी विकास बस सरकारी आंकड़ो और चंद लोगो की बढती जेबों तक सिमित है आम जनमानस आज भी दो रोटी के उपार्जन में जिन्दगी की चक्की में सुबह शाम पीस रहा है| लोकतंत्र भारतीय जनमानस के लिए कोढ़ सिद्ध हुई है अबतक आगे ईश्वर जाने क्या होना है|

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