बिहार तो संभल ही नहीं रहा है तो देश कैसे संभलेगा पी एम इन वेटिंग जी

नीतीशजी का इरादा राष्ट्रीय फलक पर छा जाने का है |बड़ी अच्छी और स्वाभाविक बात है |हर नेता कुछ ऐसे ही सपने देखता होगा |देखना ये रहता है कि उसके सपने और उसके इरादों को किन – किन सच्चाइयों का सामना करना है और किन पत्थरों को अपने रास्ते से हटाना है |नीतीश इन दिनों बिहार के बाहर अपनी पार्टी को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने की कवायद में लगे हैं  |गुजरात ,दिल्ली ,ओडिशा ,राजस्थान सहित तमाम उन राज्यों में उन्होंने इसके प्रयास एज कर दिए हैं |फिलहाल तो स्थिति बहुत उत्साहवर्धक नहीं है |क्यूंकि उत्तर प्रदेश सहित जिन पांच राज्यों में इस वर्ष चुनाव हुए वहां उनके चाहने वालों को घोर निराशा हुई |उत्तर प्रदेश में तो उन्होंने कोशिश तक नहीं की |बगल के राज्य झारखण्ड में भी उनकी चुनौती नहीं के बराबर है |दिल्ली के नगर निगम चुनाव में भी उन्होंने जी – जान लगा दी लेकिन हासिल कुछ भी नहीं हुआ |फ़िलहाल तो उनकी तमाम कोशिश को उन प्रदेशों की जनता ने सिरे से नकार दिया है |शायद उसकी मुख्या  वजह ये है कि अन्य प्रदेशों की जनता बिहार की हालत से उनकी पार्टी को कसौटी पर परखने लगी है और उन्हें लगता है कि जब बिहार ही पटरी पर नहीं है तो फिर इनके वादों का क्या ऐतबार |पूरे भारतवर्ष में घूम – घूम कर शराबबंदी के नाम पर अपनी पीठ ठोंक रहे नीतीश ये भूल गए हैं कि तमाम ऐसे फ्रंट हैं जिन पर उनकी सरकार ने अभी तक या तो कुछ किया नहीं है या फिर जो किया है वो इतना कम कि वो किसी को नज़र ही नहीं आ रहा है |उनकी ज्यादातर घोषणाएं फिलहाल कागज़ पर ही हैं |कृषि , शिक्षा ,स्वास्थ ,सफाई , नियोजन ,महिला सुरक्षा -कल्याण ,विधि – व्यवस्था ,रोज़गार ,उद्योग और अन्य तमाम क्षेत्रों में किये जा रहे कार्यों का ढिंढोरा खूब पीता जा रहा है लेकिन आम आदमी इनसे महरूम है |अस्पतालों में मरीजों को जिन मुश्किलात का सामना रोजाना करना पर  रहा है वह किसी से छिपा नहीं है |महिलाओं के साथ बलात्कार और उन पर हो रहे अत्याचारों की ख़बरें अखबारों में भरी पड़ी रहती हैं |शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का दोहन चरम पर है ,किसानो की हालत पतली होती जा रही है | गरज ये कि जिन वादों  पर यकीन कर के बिहार की जनता ने गठबंधन सरकार के हाथों में अपने सपने और उम्मीदें सौंप दी थी अब उनके पास इंतजार के अलावा कुछ है नहीं |यहाँ तक की शराब बंदी की भी असलियत रोजाना सामने आ रही है |अब तो यह भी साफ़ हो गया है कि इस मामले में राज्य की पुलिस तक राज्य सरकार के साथ नहीं है |फिलहाल तो पुलिस ने इसके खिलाफ आन्दोलन सा छेड़ रखा है |ऐसे में बिहार को सुधरने का काम छोड़कर अन्य प्रदेशो में दौरे करते रहने से नीतीशजी को क्या हासिल होगा ,यह कहना मुश्किल है |शायद उनका और उनकी सरकार का एकसूत्री काम भाजपा मुक्त भारत बनाने के लिए प्रयास करना हो गया है |अच्छा है ,लेकिन ध्यान रखियेगा कि आपके इस प्रयास में कहीं बिहारवासियों का भ्रम भी आपसे न टूट जाये |वैसे भी महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है |वैसे भी अक्लमंदी इसी में है कि पहले अपना घर संभाल लीजिये फिर कहीं और नज़र डालिए |बिहार वासियों  से किये गए अपने वादों को पूरा कीजिये |बिहार एक बार फिर से दस साल पीछे जा रहा है ,उसे पटरी पर लाना और उसकी छवि मजबूत करना ज्यादा जरूरी है |और अंत में एक कटु सत्य , २०२४ से पहले आप न तो भाजपा को मात दे सकेंगे और न ही नरेद्र मोदी को ,उसके लिए भागीरथ प्रयास की जरूरत पड़ेगी |नीतीशजी आपकी टांग खींचने के लिए तो बिहार में आपके तथाकथित सहयोगी ही काफी हैं ,पहले उनकी काट तो ढूंढ लीजिये |

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