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अयोध्या – Virat News

अयोध्या

  1. अयोध्या का अर्थ जिसे जीता ना जा सके होता है। योध्या का मतलब जिससे युद्ध किया जा सके यानी जिसे युद्ध किया जा सकता है उसे जीता भी जा सकता है लेकिन अयोध्या जिसे युद्ध न किया जा सके यानी उसे जीता भी नहीं जा सकता है । उस अयोध्या पर आज हिंदू समाज अपने आप को पराजित महसूस करता है क्योंकि उसके शिखर पुरुष श्री राम के जन्मभूमि पर आज भी भारी विवाद बना हुआ है । वास्तव में यह कोई धार्मिक विषय ना होकर आस्था का विषय है – राष्ट्रीय आस्था का विषय है । उस राष्ट्र के आस्था का विषय जिसकी जीवन पद्धति श्री राम के जीवन को आदर्श मानकर तय होती है। ऐसा नहीं है के विवाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा के समय से उत्पन्न हुआ है । राम जन्मभूमि मंदिर के ध्वंस के बाद से ही संपूर्ण हिंदू समाज इस बात को लेकर आंदोलित रहा है और जब भी उसे मौका मिला उसने इस मस्जिद पर हमला किया और इसे तोड़ने का प्रयास किया। अट्ठारह सौ पचासी हो या फिर आजादी के पहले के दो-तीन मौके बाबरी मस्जिद पर हमले हुए , हिंदू जनमानस ने इस कलंक को मिटाने का प्रयास किया। उस समय कोई भारतीय जनता पार्टी या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नहीं था । यह भारतीय जनमानस का स्वतःस्फूर्त प्रतिक्रिया थी। यह बात जरूर है आजादी के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उस से जुड़े हुए संगठन ने भारतीय जनमानस के इस दर्द को महसूस किया और श्री राम जन्मभूमि के पुनर्निर्माण की दिशा में सार्थक और गंभीर प्रयास किया। यहां किसी को मुसलमानों से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन वैसे मुसलमानों से अवश्य दिक्कत है जो अपने आप को बाबर का प्रतिनिधि समझते हैं और तथाकथित बाबरी मस्जिद के पक्ष में तलवार भाजते फिरते हैं । इससे कौन इंकार कर सकता है कि मुगलों ने भारी संख्या में मंदिरों का विध्वंस किया ? इसके ऐतिहासिक साक्ष्य है । मुसलमान आक्रमणकारियों के पहले इस तरह से धार्मिक स्थलों के धवंस की प्रक्रिया देखने को नहीं मिलती है। मुझे लगता है कि भारतीय समाज में सद्भावना पूर्वक रहने के लिए मुसलमानों को हिंदू समाज के आस्था का सम्मान करना चाहिए। आज वे भले मुसलमान है लेकिन उनके पूर्वज हिंदू थे । वास्तव में भारतीय मुसलमानों को उन मुस्लिम आक्रमणकारियों के खिलाफ अपनी भावना रखनी चाहिए जिन्होंने उन्हें भी विधर्मी बनाने का काम किया। भगवान राम केवल हिंदुओं के पूर्वज नहीं है बल्कि उन सभी अहिंदुओं के भी पूर्वज है जो किसी काल में विभिन्न कारणों से दूसरे धर्मों में चले गए।

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