बिहार क्रिकेट …..वही किस्सा पुराना है

दो  दशक से ऊपर हो गए यह सुनते -सुनते कि बिहार क्रिकेट और यहाँ के क्रिकेटर्स के दिन बहुरेंगे |लेकिन हर बार ढाक के वही तीन पात |मुकदमा ,कोर्ट -कचहरी ,बी सी सी आई के पेंच |इन सबसे निकले तो बिहार में क्रिकेट की राजनीति और क्रिकेट की तिजारत करने वाले गुट |बीस साल से बिहार में अहम् और राजनीति के चक्कर में खिलाडियों के भविष्य की बलि चढाने वाले लोग इसी पटना में बैठे हैं |उनसे बातें कीजिये तो ऐसा लगेगा कि इतने सुलझे हुए लोगों के होते हुए बिहार क्रिकेट की गुत्थी सुलझने का नाम क्यूं नहीं ले रही है |बी सी ए और ए बी सी जैसी संस्थाएं अभी भी बिहार में दर्जनों क्रिकेट प्रतियोगिताएं करवा रही हैं , और दोनों का ही दावा है कि बी सी सी आई ने उन्हें हरी झंडी दे दी है |खिलाडी जी – जान से अपना सर्वश्रेष्ठ देने में जुटें हैं |खूब रन बना रहे हैं , ढेरों विकेट ले रहे हैं और खुश हो रहे हैं कि आने वाले दिनों में उनके लिए राष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के दरवाज़े खुल जायेंगे |लेकिन सच तो यह है की बेचारे खिलाती यह नहीं समझ पा रहे हैं कि प्रदेश में अपने – आप को क्रिकेट और क्रिकेटर्स का मसीहा बताने वाले चंद लोग उनके लिए कितने क्रूर साबित होने जा रहे हैं |बी सी ए ने अपनी बैठक कर अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है लेकिन यह शंका भी ज़ाहिर की है की कुछ लोग (ए बी सी वाले ) राह में रोड़े अटकाने का काम कर रहे हैं | दूसरी और ए बी सी का भी ऐसा ही आरोप है |उसके सुप्रीमो आदित्य वर्मा भी यही दावा कर रहे है कि ,बिहार क्रिकेट का भविष्य उन्ही के हाथो में सुरक्षित है |उनके बयानों से ऐसा लगता है जैसे बी सी सी आई ने उन्हें कह दिया है कि आप ही सब कुछ देखेंगे |दूसरी और बी सी ए है ,जो अपने आप को प्रदेश की एकमात्र और असली क्रिकेट संस्था बताने के साथ – साथ खिलाडियों को यकीन दिला रही है कि बी सी सी आई द्वारा उसे ही सारे अधिकार मिलेंगे | सभी जानते हैं कि लोढ़ा समिति की रिपोर्ट के बाद जो स्थिति है और उसकी जो अनुसंशा है उसके मुताबिक एक प्रदेश से सिर्फ एक ही एसोशिएसन को मताधिकार और और बाकी सारे अधिकार मिलेंगे |अब ऐसी स्थिति में दो – दो लोग जब अपना दावा ठोंकेगे तो फिर खिलाडियों की बलि चढ़ेगी |बी सी सी आई के पास पहले की तरह ही फिर यह बहाना होगा कि ,पहले विवाद सुलझा लीजिये |बी सी ए का प्रबंधन ज़ाहिर तौर से भले ही अब्दुल बारी सिद्दीकी ,अजय नारायण शर्मा ,एल पी वर्मा या रवि शंकर न कर रहे हों , लेकिन सभी जानते हैं कि वहां की सारी रूप – रेखा आज भी इन्ही लोगों के निर्देश पर तय् होती है |कोई कुछ भी कहे लेकिन इतना तय है कि इस बार अगर इन दोनों एसोशिएसनो का विवाद बना रहा तो बिहार क्रिकेट का फिर से दस – बीस साल पीछे जाना तय है |

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