यादों के झरोखों से राष्ट्रपति चुनाव

जुलाई के अंतिम सप्ताह में देश को नए राष्ट्रपति मिल जायेंगे |देश के प्रथम नागरिक की गरिमा और उनके महत्व से हम सभी वाकिफ हैं |इस वक़्त देश में इस बात के तमाम कयास लगाये जा रहे हैं कि अगले राष्ट्रपति निर्विरोध चुने जायेंगे या फिर इस बार भी वोटिंग की नौबत जरूर आएगी |इस चुनाव को विपक्ष ने मौजूदा सरकार के विरुद्ध एकजुट होने के अवसर के रूप में चुना है |उसे लगता है कि इसी बहाने ,साड़ी विपक्षी पार्टियों का एक ऐसा गठबंधन बन सकेगा जो २०१९ के आम चुनाव में भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों को टक्कर देने में सक्षम होगा |विपक्ष को भी मालूम है की उसके प्रत्याशी का जीतना लगभग नामुमकिन है फिर वह अपना प्रत्याशी उतारने पर उतारू है |वैसे चुनाव और वोटिंग की यह परंपरा राष्ट्रपति पद के लिए नई नहीं है |देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी वोटिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था |१९५२ में देश में प्रथम राष्ट्रपति के चुनाव में भी आम सहमति नहीं बनी थी |उस चुनाव में राजेंद्र बाबू के विरुद्ध चार उम्मीदवार मैदान में थे |डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उस चुनाव में सर्वाधिक ( पांच लाख से अधिक ) वोट हासिल कर जीत प्राप्त की थी | उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे थे के टी शाह |उन्हें महज ९२ हज़ार मत मिले थे |१९५७ में भी राजेंद्र बाबू को वोटिंग का सामना करना पड़ा था |इस बार भी वो करीब पौने पञ्च लाख वोट लाकर आसानी से जीते थे |राष्ट्रपति का चुनाव अब तक चौदह बार हुआ है और सिर्फ एक बार ही ऐसा अवसर आया है जब किसी को निर्विरोध चुना   गया हो |ऐसा १९७७ में हुआ था जब नीलम संजीव रेड्डी के खिलाफ कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं था |उसका कारण था आम चुनाव में कांग्रेस का बुरी तरह हार जाना | तत्कालीन जनता सरकार ने नीलम रेड्डी को जब उम्मीदवार घोषित किया तो कांग्रेस अपना कोई भी उम्मीदवार उतारने का साहस नहीं जुटा सकी थी |नीलम संजीव रेड्डी देश के सातवें राष्ट्रपति बने थे |उसके पहले या उसके बाद का कोई भी राष्ट्रपति देश को ऐसा नहीं मिला जिसे वोटिंग का सामना न करना पड़ा हो |मौजूदा राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को भी २०१२ में चुनाव और वोटिंग से रूबरू होना पड़ा था |उन्होंने सात लाख तेरह हज़ार मत हासिल किये थे ,जबकि विपक्षी प्रत्याशी पी ए संगमा को करीब सवा तीन लाख वोट ही प्राप्त हो सके थे |

डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बाद डॉ.सर्वपल्ली राधा कृष्णन को भी वोटिंग का सामना करना पड़ा |उनके मामले में लगभग सर्वसम्मति बन गई थी फिर भी वोटिंग की नौबत आ गई थी |सबसे निकटतम मुकाबला १९६७ के राष्ट्रपति चुनाव में देखने को मिला था जब डॉ. जाकिर हुसैन को चार लाख ७१ हज़ार और कोटा सुब्बा राव को तीन लाख ६३ हज़ार मत मिले |डॉ. जाकिर हुसैन के निधन के बाद १९६९ में ही पुनः राष्ट्रपति का चुनाव कराना पड़ा |इस बार मुकाबला हुआ वी वी गिरी और नीलम संजीव रेड्डी में |वी वी गिरी को जहां चार लाख से अधिक मत मिले वहीं नीलम संजीव रेड्डी को तीन लाख १३ हज़ार |१९७४  में फखरुद्दीन अली अहमद देश के छठे राष्ट्रपति बने |लेकिन त्रिदीब चौधरी ने भी नामांकन कर दिया और वोटिंग की नौबत आ गई |हांलाकि उनके वोटों की संख्या नगण्य सी ही रही |१९७७ में नीलम संजीव रेड्डी जनता सरकार के प्रत्याशी के रूप में निर्विरोध चुन लिए गए |इस चुनाव के जल्दी होने की वजह थी तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली का गुज़र जाना |देश के नौवें राष्ट्रपति आर वेंकटरमन सात लाख ४० हज़ार वोट पाकर राष्ट्रपति बने |उनके मुकाबले में उतारे गए वी कृष्णन अय्यर को दो लाख ८१ हज़ार मत मिले थे |दसवें राष्ट्रपति डॉ.शंकर दयाल शर्मा को १९९२ में ६ लाख ७५ हज़ार वोट मिले थे |उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी जी जी स्वेल को तकरीबन साढ़े तीन लाख मत प्राप्त हुए थे |इस बार प्रख्यात वकील राम जेठमलानी भी मैदान में थे |उन्हें मिलने वाले वोटों की संख्या थी महज़ २७ हज़ार | ग्यारहवें राष्ट्रपति चुने गए थे श्री के आर नारायणन |उनका चुनाव लगभग एकतरफा रहा था |उन्हें साढ़े नौ लाख से भी ऊपर मत मिले थे जबकि उनके मुकाबले उतरे पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषण को मात्र ५० हज़ार |२००२ में अटलजी की सरकार ने व्यापक सहमति से डॉ. ए पी जे अब्दुल कलाम को उतरा मगर उन्हें भी अंततः वोटिंग का सामना करना पड़ गया |वामपंथी दलों ने कैप्टन लक्ष्मी को उतार ही दिया |हांलाकि उनके मतों की संख्या नहीं के बराबर रही |२००७ में संप्रग सरकार की प्रत्याशी थीं प्रतिभा पाटिल और छह लाख ३८ हज़ार मत पाकर जीत भी गईं ,लेकिन विपक्ष ने तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत को मैदान में उतार दिया था |उन्हें तीन लाख ३१ हज़ार मत मिले थे |

इस प्रकार राष्ट्रपति चुनाव में १९७७ को छोड़कर हर बार वोटिंग की नौबत आती रही है |इस बार भी यही होने जा रहा है |अभी तक मोदी सरकार और विपक्ष दोनों ने ही अपने प्रत्याशी के नाम का खुलासा अब तक नहीं किया है | वोटों के समीकरण ऐसे हैं कि विपक्षी प्रत्याशी का जीतना नामुमकिन होगा , फिर भी मुकाबला दिलचस्प हो सकता है |समस्त देश वासियों की उत्सुकता इस बात को लेकर बनी हुई है |देखना है कि देश के पन्द्रहवें राष्ट्रपति के रूप में हमें कौन सी सख्सियत मिलती है |फ़िलहाल तो देश को इंतजार है अपने अगले प्रथम नागरिक का |

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