राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर हिंदू सेना ने दावा किया है कि यह स्थान पहले शिव मंदिर था। इस याचिका का आधार पूर्व न्यायिक अधिकारी हरबिलास शारदा की 1911 की पुस्तक है।
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे की याचिका स्वीकार होने के बाद अजमेर दरगाह के दीवान ने पहली बार मीडिया के सामने अपनी बात कही है और हिंदू सेना के दावे को खारिज किया है। जानिये क्या बोले दरगाह के दीवान
अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचन महादेव मंदिर होने का दावा करते हुए अजमेर सिविल कोर्ट में लगाई गई याचिका को कोर्ट ने सुनने योग्य माना है।